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mettant en avant « masturbate »:
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La durée de 00:07:12 secondes et le titre Masturbation & Spirituality: Osho’s Shocking Truth 






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Analyser les causes de l’augmentation de cette pratique
Analyser les conséquences de la pornographie sur les comportements
La pornographie est un facteur influent. Elle augmente fréquemment le désir de se masturber et peut transformer la perception de la sexualité.
Parler des influences mentales et émotionnelles
L’anxiété, le stress ou un vide dans d’autres aspects de la vie peuvent engendrer cette pratique compulsive.
Explorer le lien entre la solitude et le désir
Le désir insatisfait et la solitude, qu’elles soient relationnelles ou personnelles, peuvent pousser à une pratique habituelle.
Évaluer les répercussions positives d’un arrêt réussi
Expliquer le trajet vers une joie persistante
En réduisant la dépendance, des améliorations durables peuvent être observées dans les sphères personnelle, professionnelle et sociale.
Illustrer l’évolution vers une meilleure gestion de la santé mentale
Mettre fin à cette pratique engendre fréquemment une hausse d’énergie, une humeur plus positive et une meilleure concentration.
Montrer comment les relations interpersonnelles s’améliorent
Les liens avec un partenaire deviennent plus intenses, renforçant l’unité émotionnelle et physique.
Se pencher sur la dépendance à la masturbation pour en comprendre les effets
Observer les signes d’un comportement addictif
Lorsque la masturbation devient habituelle, elle est souvent marquée par une fréquence élevée et un contrôle insuffisant, ce qui peut perturber les relations amoureuses et affectives.
Observer les influences sur le bien-être physique et mental
Une dépendance à la masturbation, souvent associée à un usage excessif de pornographie, sollicite constamment le système dopaminergique, engendrant des problèmes tels que l’éjaculation précoce, la baisse d’énergie et une insatisfaction dans les relations sexuelles.
Analyser ce qu’est la masturbation et les comportements associés
Connue pour ses effets bénéfiques sur la santé, comme la gestion du stress et une meilleure conscience corporelle, la masturbation peut devenir problématique si elle est pratiquée de manière compulsive.
Développer une approche pour arrêter
Recommander des méthodes adaptées pour limiter cette activité
- Substituer à la pratique par d’autres loisirs : Explorez de nouvelles passions ou engagez-vous dans des activités sportives.
- Mettre en place des objectifs clairs : Suivez des stratégies progressives ou rejoignez le mouvement « nofap » pour une abstinence totale.
- Identifier ce qui déclenche l’envie : Prenez note des moments où vous ressentez le besoin.
Présenter un plan de prévention contre les rechutes
- Organiser une journée structurée : Remplissez votre emploi du temps avec des activités variées et bien planifiées.
- Créer un emploi du temps bien organisé : Remplissez votre journée de tâches et de loisirs bien définis.
Mettre en lumière le rôle clé du soutien social
- Consulter un sexologue : Un spécialiste pourra proposer des stratégies adaptées. comme www.chastete.fr installé en France.
- Participer à des groupes de soutien : L’échange avec des personnes ayant des objectifs similaires est motivant.
Sexualité et addiction à la masturbation : trouver des solutions
Nombreux sont ceux qui trouvent difficile d’arrêter la masturbation, une pratique habituellement perçue comme normale et bénéfique pour la sexualité. Pourtant, quand elle devient habituelle ou addictive, elle peut perturber des aspects importants de la vie, comme le travail, la stabilité émotionnelle ou les interactions sociales.
En définitive
L’arrêt de la masturbation excessive nécessite une démarche patiente et persistante. Avec un plan adapté et un soutien bienveillant, il est possible de surmonter ce défi et de vivre une vie plus équilibrée, axée sur des objectifs plus épanouissants.
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#Masturbation #spiritualité #vérité #choquante #dOsho
Retranscription des paroles de la vidéo: तुम सुख की तलाश में हो। लेकिन क्या कभी रुक कर यह सोचा है कि जिस सुख के पीछे तुम भाग रहे हो, वह सच में सुख है या सिर्फ एक पल का नशा। हस्तमैथुन उस नशे की तरह है जो शुरू में मीठा लगता है। लेकिन अंत में भीतर एक अजीब सा खालीपन छोड़ जाता है। जब तुम इसे करते हो तो लगता है जैसे सारी बेचैनी खत्म हो गई। मन हल्का हो गया। लेकिन कुछ ही पलों बाद शरीर ढीला पड़ जाता है। आंखों में वह चमक नहीं रहती। और मन में कहीं ना कहीं एक बोझ आकर बैठ जाता है कि तुमने अपनी ही ताकत को एक पल के आनंद के लिए गिरवी रख दिया। यह एक आदत नहीं, यह धीरे-धीरे अपनी ही ऊर्जा का सौदा है। तुम सोचते हो कि यह तुम्हारा निजी मामला है, लेकिन यह तुम्हारे आत्मविश्वास, तुम्हारे व्यवहार और यहां तक कि तुम्हारी उपस्थिति में झलकने लगता है। समस्या सिर्फ यह नहीं है कि यह तुम्हारे शरीर को कमजोर करता है। असली खतरा यह है कि यह तुम्हारे मन को गुलाम बना देता है। यह एक आदत बन जाती है एक चक्र। जिसमें उत्तेजना, सुख, थकान और फिर वही लालसा बार-बार आती है। तुम सोचते हो कि तुम इसे नियंत्रित कर रहे हो। लेकिन धीरे-धीरे यह आदत तुम्हें नियंत्रित करने लगती है। एक तस्वीर, एक वीडियो, एक नोटिफिकेशन और तुम्हारा मन उसी पुराने रास्ते पर दौड़ पड़ता है। तुम चाहकर भी इससे दूर नहीं रह पाते क्योंकि तुमने अपने दिमाग को बार-बार यह सिखाया है कि तनाव या अकेलेपन से बचने का सबसे आसान तरीका यही है। यह असली आजादी नहीं, यह मानसिक गुलामी है। और गुलामी चाहे शरीर की हो या मन की दोनों ही तुम्हारी आत्मा को तोड़ देती हैं। देखो यह केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है। यह तुम्हारे भीतर के खालीपन का आईना है। हस्तमैथुन अक्सर तब होता है जब तुम अकेले हो, बेचैन हो या भावनात्मक रूप से खाली महसूस करते हो। यह तुम्हारे भीतर की उस कमी को भरने का एक सस्ता तरीका है। लेकिन वह कमी कभी भरती नहीं। तुम बस उसे कुछ मिनटों के लिए ढक देते हो। जैसे कोई टूटी दीवार पर रंग कर दे बाहर से सुंदर लगे लेकिन अंदर से वही दरारें बनी रहे। सच्चाई यह है कि सुख की यह आदत तुम्हें भीतर से और ज्यादा खाली करती है। ताकि अगली बार तुम्हें और ज्यादा चाहत महसूस हो। यह एक अंतहीन चक्र है। और जब तक तुम इसे पहचान कर तोड़ोगे नहीं, यह तुम्हें पूरी तरह से थका देगा। ऊर्जा यही तुम्हारी असली पूंजी है। यह वही शक्ति है जिससे तुम सोचते हो, बोलते हो, रचते हो, प्यार करते हो, सपने देखते हो और हस्तमैथुन उस ऊर्जा का सबसे तेज रिसाव है। तुम उस बीज को जो जीवन पैदा कर सकता है, कुछ सेकंड के भ्रम में नष्ट कर देते हो। यह वैसा है जैसे एक किसान अपने सबसे अच्छे बीजों को सड़क पर फेंक दे। सिर्फ इसलिए कि वह एक पल के लिए हल्का महसूस करना चाहता है। जब यह ऊर्जा भीतर रहती है तो यह तुम्हें चुंबकीय बनाती है। तुम्हारी आवाज में गहराई आती है। आंखों में चमक, चेहरे पर आत्मविश्वास और शरीर में ताकत। लेकिन जब तुम इसे बर्बाद करते हो तो यह सब धीरे-धीरे फीका पड़ जाता है। समस्या यह है कि अधिकतर लोग इसे गलत जगह से देखना शुरू करते हैं। वे इसे सिर्फ पाप या गलती मानकर खुद को दबाने लगते हैं और दबाने से यह और भी गहराई में बैठ जाती है। तुम जितना इसे रोकने की कोशिश करते हो, उतना ही मन इसे चाहता है। असली रास्ता रोकने में नहीं समझने में है। जब तुम यह देख पाओगे कि यह सुख असल में तुम्हें और खाली कर रहा है, तब तुम्हारा मन खुद ही इससे मुक्त होना चाहेगा। यह समझ तुम्हें अपराध बोध से नहीं बल्कि जागरूकता से मिलेगी। और जब जागरूकता आती है तो आदत का असर अपने आप खत्म होने लगता है। हस्तमैथुन की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह धीरे-धीरे तुम्हारे आत्मविश्वास को खा जाता है। शुरुआत में तुम इसे सिर्फ एक आदत मानते हो। लेकिन समय के साथ तुम्हें महसूस होता है कि तुम्हारे भीतर का पुरुषत्व वह निडर्पण व प्राकृतिक आकर्षण कम होने लगा है। तुम्हारी चाल, तुम्हारी नजर, तुम्हारी आवाज सब में एक थकान सी आ जाती है। और यह सिर्फ शारीरिक नहीं मानसिक भी है। तुम खुद से ही नाराज रहने लगते हो। और यह नाराजगी तुम्हारे रिश्तों और फैसलों में दिखने लगती है। यह एक धीमा जहर है जो तुम्हारे व्यक्तित्व को धीरे-धीरे खत्म करता है। अगर तुम सच में मजबूत बनना चाहते हो तो अपनी ऊर्जा को बचाना सीखो। यह वही ऊर्जा है जो तुम्हें असली आत्मविश्वास देती है जो तुम्हें भीड़ में अलग बनाती है। जब तुम इस ऊर्जा को भीतर रखते हो तो यह तुम्हारी सोच को तेज करती है। जब तुम इस तुम्हारे शब्दों में असर लाती है। तुम्हारे फैसलों में दृढ़ता भरती है। और सबसे अहम बात यह तुम्हें अपने ऊपर नियंत्रण का एहसास कराती है। यह नियंत्रण वही असली ताकत है जो तुम्हें किसी भी चुनौती के सामने डटकर खड़े होने की क्षमता देती है। सोचो क्या कोई आदमी जो हर बार अपनी ही ऊर्जा खोता है सच में जीवन के बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है। क्या वह अपने सपनों के पीछे उतनी ही ताकत और जुनून के साथ भाग सकता है। सच तो यह है कि जो आदमी खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकता वह किसी भी बड़ी चीज पर नियंत्रण नहीं रख सकता। हस्तमैथुन तुम्हें तुरंत सुख तो देता है, लेकिन यह तुम्हें लंबे समय के लक्ष्यों से दूर कर देता है। यह तुम्हें सुस्त, ढीला और टालमटोल करने वाला बना देता है। और धीरे-धीरे तुम्हारा जीवन उन्हीं छोटे-छोटे सुखों में खत्म हो जाता है। जबकि तुम कुछ बड़ा कर सकते थे। मुक्ति का रास्ता है जागरूकता। खुद को दोषी मत मानो। लेकिन खुद को अंधा भी मत बनाओ। यह देखो कि जब भी यह इच्छा आती है, उसके पीछे कौन सा खालीपन है, कौन सी बेचैनी है। उस खालीपन को भरने के और तरीके खोजो। व्यायाम, ध्यान, रचनात्मक काम, नए कौशल सीखना। जब तुम अपनी ऊर्जा को किसी सृजनात्मक काम में लगाते हो तो वही ऊर्जा तुम्हें 10 गुना ताकत के साथ लौटती है। यह सुख स्थाई होता है। यह तुम्हें थकाता नहीं बल्कि और ताकतवर बनाता है। आखिर में खुद से यह सवाल पूछो। क्या मैं इतना कमजोर हूं कि एक पल की चाहत मुझे हरा दे? या मैं इतना मजबूत हूं कि अपनी ऊर्जा को बचाकर उसे अपने जीवन को बेहतर बनाने में लगा सकूं। याद रखो। सुख वही है जो तुम्हें और शक्तिशाली बनाए। जो तुम्हें भीतर से स्वतंत्र करे। हस्तमैथुन में जो सुख है वह तुम्हें सिर्फ गुलाम बनाता है। अगर तुमने इस भ्रम को पहचान लिया तो तुम्हारा मन खुद ही इससे दूर हो जाएगा। और उस दिन तुम समझोगे असली सुख बाहर नहीं भीतर है। और वह सुख किसी आदत का कैदी नहीं होता। वह तुम्हारी स्वतंत्रता का परिणाम होता है। .

Déroulement de la vidéo:
0.08 तुम सुख की तलाश में हो। लेकिन क्या कभी
3.12 रुक कर यह सोचा है कि जिस सुख के पीछे तुम
5.839 भाग रहे हो, वह सच में सुख है या सिर्फ एक
8.639 पल का नशा। हस्तमैथुन उस नशे की तरह है जो
12.16 शुरू में मीठा लगता है। लेकिन अंत में
14.559 भीतर एक अजीब सा खालीपन छोड़ जाता है। जब
17.92 तुम इसे करते हो तो लगता है जैसे सारी
20.48 बेचैनी खत्म हो गई। मन हल्का हो गया।
24.24 लेकिन कुछ ही पलों बाद शरीर ढीला पड़ जाता
26.8 है। आंखों में वह चमक नहीं रहती। और मन
30.24 में कहीं ना कहीं एक बोझ आकर बैठ जाता है
33.6 कि तुमने अपनी ही ताकत को एक पल के आनंद
36.719 के लिए गिरवी रख दिया। यह एक आदत नहीं, यह
40.719 धीरे-धीरे अपनी ही ऊर्जा का सौदा है। तुम
43.92 सोचते हो कि यह तुम्हारा निजी मामला है,
46.559 लेकिन यह तुम्हारे आत्मविश्वास,
48.96 तुम्हारे व्यवहार और यहां तक कि तुम्हारी
51.6 उपस्थिति में झलकने लगता है। समस्या सिर्फ
54.879 यह नहीं है कि यह तुम्हारे शरीर को कमजोर
57.12 करता है। असली खतरा यह है कि यह तुम्हारे
59.92 मन को गुलाम बना देता है। यह एक आदत बन
63.6 जाती है एक चक्र। जिसमें उत्तेजना, सुख,
67.68 थकान और फिर वही लालसा बार-बार आती है।
71.68 तुम सोचते हो कि तुम इसे नियंत्रित कर रहे
74.159 हो। लेकिन धीरे-धीरे यह आदत तुम्हें
77.36 नियंत्रित करने लगती है। एक तस्वीर, एक
80.56 वीडियो, एक नोटिफिकेशन और तुम्हारा मन उसी
84.88 पुराने रास्ते पर दौड़ पड़ता है। तुम
87.84 चाहकर भी इससे दूर नहीं रह पाते क्योंकि
90.4 तुमने अपने दिमाग को बार-बार यह सिखाया है
93.2 कि तनाव या अकेलेपन से बचने का सबसे आसान
97.28 तरीका यही है। यह असली आजादी नहीं, यह
100.4 मानसिक गुलामी है। और गुलामी चाहे शरीर की
103.52 हो या मन की दोनों ही तुम्हारी आत्मा को
105.759 तोड़ देती हैं। देखो यह केवल एक शारीरिक
108.799 क्रिया नहीं है। यह तुम्हारे भीतर के
111.36 खालीपन का आईना है। हस्तमैथुन अक्सर तब
114.88 होता है जब तुम अकेले हो, बेचैन हो या
118.159 भावनात्मक रूप से खाली महसूस करते हो। यह
121.28 तुम्हारे भीतर की उस कमी को भरने का एक
124.0 सस्ता तरीका है। लेकिन वह कमी कभी भरती
126.96 नहीं। तुम बस उसे कुछ मिनटों के लिए ढक
130.16 देते हो। जैसे कोई टूटी दीवार पर रंग कर
133.12 दे बाहर से सुंदर लगे लेकिन अंदर से वही
136.239 दरारें बनी रहे। सच्चाई यह है कि सुख की
139.68 यह आदत तुम्हें भीतर से और ज्यादा खाली
142.16 करती है। ताकि अगली बार तुम्हें और ज्यादा
144.8 चाहत महसूस हो। यह एक अंतहीन चक्र है। और
149.2 जब तक तुम इसे पहचान कर तोड़ोगे नहीं, यह
152.08 तुम्हें पूरी तरह से थका देगा। ऊर्जा यही
155.2 तुम्हारी असली पूंजी है। यह वही शक्ति है
158.72 जिससे तुम सोचते हो, बोलते हो, रचते हो,
161.599 प्यार करते हो, सपने देखते हो और
164.239 हस्तमैथुन उस ऊर्जा का सबसे तेज रिसाव है।
168.08 तुम उस बीज को जो जीवन पैदा कर सकता है,
172.16 कुछ सेकंड के भ्रम में नष्ट कर देते हो।
175.04 यह वैसा है जैसे एक किसान अपने सबसे अच्छे
177.84 बीजों को सड़क पर फेंक दे। सिर्फ इसलिए कि
180.8 वह एक पल के लिए हल्का महसूस करना चाहता
183.44 है। जब यह ऊर्जा भीतर रहती है तो यह
186.8 तुम्हें चुंबकीय बनाती है। तुम्हारी आवाज
189.76 में गहराई आती है। आंखों में चमक, चेहरे
192.48 पर आत्मविश्वास और शरीर में ताकत।
195.599 लेकिन जब तुम इसे बर्बाद करते हो तो यह सब
198.879 धीरे-धीरे फीका पड़ जाता है। समस्या यह है
201.76 कि अधिकतर लोग इसे गलत जगह से देखना शुरू
204.72 करते हैं। वे इसे सिर्फ पाप या गलती मानकर
208.0 खुद को दबाने लगते हैं और दबाने से यह और
211.2 भी गहराई में बैठ जाती है। तुम जितना इसे
214.64 रोकने की कोशिश करते हो, उतना ही मन इसे
217.76 चाहता है। असली रास्ता रोकने में नहीं
220.4 समझने में है। जब तुम यह देख पाओगे कि यह
223.44 सुख असल में तुम्हें और खाली कर रहा है,
225.92 तब तुम्हारा मन खुद ही इससे मुक्त होना
228.48 चाहेगा। यह समझ तुम्हें अपराध बोध से नहीं
232.08 बल्कि जागरूकता से मिलेगी। और जब जागरूकता
235.76 आती है तो आदत का असर अपने आप खत्म होने
238.879 लगता है। हस्तमैथुन की सबसे खतरनाक बात यह
242.319 है कि यह धीरे-धीरे तुम्हारे आत्मविश्वास
244.879 को खा जाता है। शुरुआत में तुम इसे सिर्फ
247.84 एक आदत मानते हो। लेकिन समय के साथ
250.319 तुम्हें महसूस होता है कि तुम्हारे भीतर
252.4 का पुरुषत्व वह निडर्पण व प्राकृतिक
256.079 आकर्षण कम होने लगा है। तुम्हारी चाल,
259.28 तुम्हारी नजर, तुम्हारी आवाज सब में एक
262.16 थकान सी आ जाती है। और यह सिर्फ शारीरिक
265.28 नहीं मानसिक भी है। तुम खुद से ही नाराज
268.88 रहने लगते हो। और यह नाराजगी तुम्हारे
271.84 रिश्तों और फैसलों में दिखने लगती है। यह
275.52 एक धीमा जहर है जो तुम्हारे व्यक्तित्व को
279.199 धीरे-धीरे खत्म करता है। अगर तुम सच में
282.0 मजबूत बनना चाहते हो तो अपनी ऊर्जा को
284.72 बचाना सीखो। यह वही ऊर्जा है जो तुम्हें
288.24 असली आत्मविश्वास देती है जो तुम्हें भीड़
290.8 में अलग बनाती है। जब तुम इस ऊर्जा को
293.759 भीतर रखते हो तो यह तुम्हारी सोच को तेज
296.479 करती है। जब तुम इस तुम्हारे शब्दों में
299.44 असर लाती है। तुम्हारे फैसलों में दृढ़ता
302.72 भरती है। और सबसे अहम बात यह तुम्हें अपने
306.08 ऊपर नियंत्रण का एहसास कराती है। यह
309.28 नियंत्रण वही असली ताकत है जो तुम्हें
312.16 किसी भी चुनौती के सामने डटकर खड़े होने
314.88 की क्षमता देती है। सोचो क्या कोई आदमी जो
319.12 हर बार अपनी ही ऊर्जा खोता है सच में जीवन
322.72 के बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है। क्या वह
325.36 अपने सपनों के पीछे उतनी ही ताकत और जुनून
328.4 के साथ भाग सकता है। सच तो यह है कि जो
331.36 आदमी खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकता वह
334.32 किसी भी बड़ी चीज पर नियंत्रण नहीं रख
336.4 सकता। हस्तमैथुन तुम्हें तुरंत सुख तो
339.36 देता है, लेकिन यह तुम्हें लंबे समय के
341.84 लक्ष्यों से दूर कर देता है। यह तुम्हें
344.4 सुस्त, ढीला और टालमटोल करने वाला बना
347.44 देता है। और धीरे-धीरे तुम्हारा जीवन
351.12 उन्हीं छोटे-छोटे सुखों में खत्म हो जाता
353.36 है। जबकि तुम कुछ बड़ा कर सकते थे। मुक्ति
356.8 का रास्ता है जागरूकता।
359.039 खुद को दोषी मत मानो। लेकिन खुद को अंधा
362.639 भी मत बनाओ। यह देखो कि जब भी यह इच्छा
365.84 आती है, उसके पीछे कौन सा खालीपन है, कौन
369.12 सी बेचैनी है। उस खालीपन को भरने के और
372.479 तरीके खोजो। व्यायाम, ध्यान, रचनात्मक
376.56 काम, नए कौशल सीखना। जब तुम अपनी ऊर्जा को
380.319 किसी सृजनात्मक काम में लगाते हो तो वही
383.199 ऊर्जा तुम्हें 10 गुना ताकत के साथ लौटती
385.84 है। यह सुख स्थाई होता है। यह तुम्हें
388.8 थकाता नहीं बल्कि और ताकतवर बनाता है।
392.08 आखिर में खुद से यह सवाल पूछो। क्या मैं
395.36 इतना कमजोर हूं कि एक पल की चाहत मुझे हरा
398.16 दे? या मैं इतना मजबूत हूं कि अपनी ऊर्जा
401.36 को बचाकर उसे अपने जीवन को बेहतर बनाने
403.84 में लगा सकूं। याद रखो। सुख वही है जो
407.44 तुम्हें और शक्तिशाली बनाए। जो तुम्हें
410.16 भीतर से स्वतंत्र करे। हस्तमैथुन में जो
413.199 सुख है वह तुम्हें सिर्फ गुलाम बनाता है।
416.08 अगर तुमने इस भ्रम को पहचान लिया तो
418.8 तुम्हारा मन खुद ही इससे दूर हो जाएगा। और
421.68 उस दिन तुम समझोगे असली सुख बाहर नहीं
424.16 भीतर है। और वह सुख किसी आदत का कैदी नहीं
427.199 होता। वह तुम्हारी स्वतंत्रता का परिणाम
429.68 होता है।
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